बांग्लादेश के के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में शिवम दुबे को जगह मिली है। इंडिया ए और घरेलू क्रिकेट में मुंबई के लिए लगातार रन बनाने के बाद उन्हें भारतीय टीम के लिए चुना गया है। 26 वर्षीय दुबे आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का हिस्सा हैं लेकिन उन्हें पिछले सीजन उन्हें खेलने का ज्यादा मौका नहीं मिला था।
4 साल रहे क्रिकेट से दूर
शिवम दुबे ने 14 साल की उम्र से 18 साल की उम्र तक क्रिकेट नहीं खेला था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी और इसी वजह से उन्हें क्रिकेट से दूर होना पड़ा। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उन्होंने पुराने दिनों के बारे में कहा
'मेरे पिता के पास पहले डेयरी का व्यवसाय था, इससे पहले कि वह 'वाशिंग' जीन्स का अपना व्यवसाय शुरू करते। भिवंडी में हमारा कारखाना था। हालांकि, मेरे क्रिकेट के कारण, मेरे पिता को वह व्यवसाय छोड़ना पड़ा, और संपत्ति किराए पर देनी पड़ी। वित्तीय कारणों के कारण, मुझे 14 से 18 साल की उम्र में लगभग चार साल के लिए क्रिकेट खेलना छोड़ना पड़ा।'
बल्लेबाजी का तरीका नहीं बदलेंगे
शिवम दुबे अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मुंबई टी-20 लीग में प्रवीण ताम्बे के एक ओवर में 5 छक्के लगाये थे वहीं रणजी ट्रॉफी में भी वह ओवर में 5 छक्के लगा चुके हैं। उन्होंने साफ़ कर दिया है कि बल्लेबाजी की शैली नहीं बदलने वाले।
'मेरी आक्रामक शैली नैचुरल है और मैं इस पर काम करता हूं। मेरे पिता हमेशा मुझे आक्रामक बल्लेबाज बनाना चाहते थे और फिर यह मेरी शैली बन गई। मुझे पावर हिटिंग पसंद है।'
चंद्रकांत पंडित से ली कोचिंग
भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज चंद्रकांत पंडित घरेलू क्रिकेट के सबसे बेहतरीन कोच माने जाते हैं। शिवम दुबे के पिता ने 6 साल की उम्र में उन्हें चंद्रकांत पंडित के पास लेकर गये थे और दुबे ने वहीं क्रिकेट सीखना शुरू किया।
चंद्रकांत पंडित ने भी उनकी जमकर तारीफ की है। उन्होंने बताया दुबे शुरुआत से ही विस्फोटक बल्लेबाज थे और उन्होंने कभी उनका खेल बदलने की कोशिश नहीं की।

4 साल रहे क्रिकेट से दूर
शिवम दुबे ने 14 साल की उम्र से 18 साल की उम्र तक क्रिकेट नहीं खेला था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी और इसी वजह से उन्हें क्रिकेट से दूर होना पड़ा। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उन्होंने पुराने दिनों के बारे में कहा
'मेरे पिता के पास पहले डेयरी का व्यवसाय था, इससे पहले कि वह 'वाशिंग' जीन्स का अपना व्यवसाय शुरू करते। भिवंडी में हमारा कारखाना था। हालांकि, मेरे क्रिकेट के कारण, मेरे पिता को वह व्यवसाय छोड़ना पड़ा, और संपत्ति किराए पर देनी पड़ी। वित्तीय कारणों के कारण, मुझे 14 से 18 साल की उम्र में लगभग चार साल के लिए क्रिकेट खेलना छोड़ना पड़ा।'
बल्लेबाजी का तरीका नहीं बदलेंगे
शिवम दुबे अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मुंबई टी-20 लीग में प्रवीण ताम्बे के एक ओवर में 5 छक्के लगाये थे वहीं रणजी ट्रॉफी में भी वह ओवर में 5 छक्के लगा चुके हैं। उन्होंने साफ़ कर दिया है कि बल्लेबाजी की शैली नहीं बदलने वाले।
'मेरी आक्रामक शैली नैचुरल है और मैं इस पर काम करता हूं। मेरे पिता हमेशा मुझे आक्रामक बल्लेबाज बनाना चाहते थे और फिर यह मेरी शैली बन गई। मुझे पावर हिटिंग पसंद है।'
चंद्रकांत पंडित से ली कोचिंग
भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज चंद्रकांत पंडित घरेलू क्रिकेट के सबसे बेहतरीन कोच माने जाते हैं। शिवम दुबे के पिता ने 6 साल की उम्र में उन्हें चंद्रकांत पंडित के पास लेकर गये थे और दुबे ने वहीं क्रिकेट सीखना शुरू किया।
चंद्रकांत पंडित ने भी उनकी जमकर तारीफ की है। उन्होंने बताया दुबे शुरुआत से ही विस्फोटक बल्लेबाज थे और उन्होंने कभी उनका खेल बदलने की कोशिश नहीं की।