रतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड को अपना नया अध्यक्ष मिल चुका है जिसमें बुधवार को सौरव गांगुली ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी को संभाल लिया है। अब सौरव गांगुली के हाथ में अगले 10 महीनों तक बीसीसीआई के कामकाज की जिम्मेदारी रहेगी जिसमें उनके द्वारा कई अच्छे और अहम फैसले किए जा सकते हैं।
एमएसके प्रसाद के भाग्य का फैसला है सौरव गांगुली के हाथ
इसी तरह से भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद का भी कार्यकाल पूरा हो चुका है। जिसके बाद अब बीसीसीआई नए मुख्य चयनकर्ता की तलाश में है।
गुरुवार को भारत के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने ही बांग्लादेश के खिलाफ आगामी सीरीज को लेकर टीम का चयन किया है लेकिन अब बीसीसीआई के अध्यक्ष बने सौरव गांगुली को तय करना है कि एमएसके प्रसाद का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा या उन्हें हटाया जाएगा।
एमएसके प्रसाद का नए संविधान के अनुसार बढ़ाया जा सकता है कार्यकाल
इस तरह से इतना तो साफ है कि मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद के भाग्य का फैसला सौरव गांगुली के हाथों में चला गया है। बीसीसीआई के नए संविधान संशोधन में अभी भी एमएसके प्रसाद का कार्यकाल बचा हुआ माना जा रहा है।
वैसे पुराने संविधान के अनुसार बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता का कार्यकाल 4 साल का था लेकिन अब इसमें संशोधन करते हुए इसे अधिकतम पांच साल का कर दिया गया है।
दादा लेंगे फैसला, कौन चयनकर्ता रहेगा बरकरार
बीसीसीआई के नए संविधान में अनुच्छेद 26(3) के अनुसार तो किसी भी व्यक्ति जो किसी क्रिकेट समिति का कुल पांच साल तक सदस्य रहा हो वो किसी दूसरे क्रिकेट समिति का सदस्य बनने के योग्य नहीं होगा।
इसके अलावा बात करें बीसीसीआई की एजीएम में नियुक्त सदस्यों की तो वहां एमएसके प्रसाद और गगन खोड़ा को 2015 में नियुक्त किया गया था उस आधार पर इनका कार्यकाल नए संविधान के अनुसार तो सितंबर 2020 में खत्म होगा।
इसके बाद अन्य तीन चयनकर्ताओं में जतिन परांजपे, सरनदीप सिंह और देबांग गांधी ने 2016 में शुरुआत की थी तो उनका अभी भी दो साल का कार्यकाल बचा है।
एमएसके प्रसाद के भाग्य का फैसला है सौरव गांगुली के हाथ

इसी तरह से भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद का भी कार्यकाल पूरा हो चुका है। जिसके बाद अब बीसीसीआई नए मुख्य चयनकर्ता की तलाश में है।
गुरुवार को भारत के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने ही बांग्लादेश के खिलाफ आगामी सीरीज को लेकर टीम का चयन किया है लेकिन अब बीसीसीआई के अध्यक्ष बने सौरव गांगुली को तय करना है कि एमएसके प्रसाद का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा या उन्हें हटाया जाएगा।
एमएसके प्रसाद का नए संविधान के अनुसार बढ़ाया जा सकता है कार्यकाल
इस तरह से इतना तो साफ है कि मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद के भाग्य का फैसला सौरव गांगुली के हाथों में चला गया है। बीसीसीआई के नए संविधान संशोधन में अभी भी एमएसके प्रसाद का कार्यकाल बचा हुआ माना जा रहा है।
वैसे पुराने संविधान के अनुसार बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता का कार्यकाल 4 साल का था लेकिन अब इसमें संशोधन करते हुए इसे अधिकतम पांच साल का कर दिया गया है।
दादा लेंगे फैसला, कौन चयनकर्ता रहेगा बरकरार
बीसीसीआई के नए संविधान में अनुच्छेद 26(3) के अनुसार तो किसी भी व्यक्ति जो किसी क्रिकेट समिति का कुल पांच साल तक सदस्य रहा हो वो किसी दूसरे क्रिकेट समिति का सदस्य बनने के योग्य नहीं होगा।
इसके अलावा बात करें बीसीसीआई की एजीएम में नियुक्त सदस्यों की तो वहां एमएसके प्रसाद और गगन खोड़ा को 2015 में नियुक्त किया गया था उस आधार पर इनका कार्यकाल नए संविधान के अनुसार तो सितंबर 2020 में खत्म होगा।
इसके बाद अन्य तीन चयनकर्ताओं में जतिन परांजपे, सरनदीप सिंह और देबांग गांधी ने 2016 में शुरुआत की थी तो उनका अभी भी दो साल का कार्यकाल बचा है।