ऑलराउंडर शिवम दुबे को भले ही बांग्लादेश के विरुद्ध भारतीय टीम में जगह मिली हो और वह बांग्लादेश के विरुद्ध बल्लेबाजी करेंगे. लेकिन असल में उनको इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके पिता राजेश दुबे का बड़ा हाथ है. शिवम दुबे के हुनर को मुंबई के अंधेरी स्थित घर में काम करने वाले नौकर ने उस समय पहचाना, जब वह 4 साल के थे. उनके पिता को लगता था कि उनका बेटा अच्छा क्रिकेट खेलता है. तभी से उनके पिता ने शिवम को क्रिकेटर बनाने का निर्णय किया.
शिवम के लिए पिता ने घर में विकेट तैयार किया. वह सुबह और शाम में घंटों अभ्यास करते थे. शिवम दुबे के पिता हर रोज 500 गेंद फेंकते थे और वह बल्लेबाजी करते थे. शिवम दुबे का डाइट प्लान भी उनके पिता ने ही तैयार किया. लगभग 14 वर्ष का होने पर शिवम दुबे ने चंद्रकांत पंडित से कोचिंग लेना शुरू किया. राजेश दुबे ने बताया कि वह खुद मुंबई में ही पैदा हुए हैं. बहुत पहले ही वह गांव छोड़कर यहां आकर बस गए और यहीं के होकर रह गए. हालांकि उनके भाई रमेश दुबे भदोही में रहते हैं, जो पूर्व सांसद हैं.

शिवम दुबे के पिता ने बताया कि बेटे को क्रिकेटर बनाने के चक्कर में उनका जींस का कारोबार बिक गया. माधुरी दुबे ने भी अपने बेटे का पूरा सहयोग किया. शिवम दुबे के माता-पिता ने अपने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया. बता दें कि शिवम दुबे को 2017-18 में आरसीबी की टीम ने 5 करोड़ रुपए में खरीदा. अब शिवम दुबे भारतीय टीम के लिए खेलते हुए नजर आएंगे.